ऊन्स तो तब भी हम आप से करते है ,
आधरो पर मुश्कान तो खिलते है
आज नहीं तो कल ए भी झूठे लगते है
तुम कहेते हो सागर के किनारे हम चलते है
तो फिर क्यों माझी के दोर्र कमज़ोर लगते है
सुलगते झिस्म कोई नयी दस्ता बाया करत है
दुरी तो तब भी बनी रहेती है
ईसक कसमकस को हम समजते है
क्या राज़ ऐसे छुपाते है
दबी कसक की धुन हम सुनते है
तनहइयो के यै साथी कहलाते है
इश्क की ईस पटरी पर हम दर्द बेचते है
मेहेफूश तो आप को हम अपने दिलो जहाँ में रखते है!
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